ओजोन गैस वायुमंडल में स्थित एक प्रकार की ऐसी परत है जिसके द्वारा धरती पर या फिर काहे पृथ्वी पर जीवन शुभ माना जाता है यह परत सूर्य की पराबैंगनी प्रकाश को 90 से 99% मात्रा में अवशोषित करके पृथ्वी पर भेजती है जिसके कारण पृथ्वी पर जीवन संभव माना जाता है यदि यह उन किरणों को अवशोषित ना करें तो यह पृथ्वी पर जीवन के लिए काफी ज्यादा हानिकारक हो जाएगी प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को ओजोन दिवस के रूप वर्तमान समय में पृथ्वी के वायुमंडल का 91% ओजोन गैस यहां पर मौजूद है पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित होती हैं इस गैस की परत मोटी और पतली होती रहती हैं वह भी भौगोलिक दृष्टि और मौसम के बदलने के कारण होती हैं

ओजोन(Ozone) परत क्या है?

सन 1913 में फ्रांस के वैज्ञानिक फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने ओजोन परत की खोज की थी परंतु इससे पहले भी यह देखने को मिला था कि सूर्य से आने वाली प्रकाश की किरणों में स्पेक्ट्रम के दिखाई देने की आशंका थी जो कि काले रंग के क्षेत्र में वर्गीकृत था और यह देखने में मिला कि 310nm से कम वेवलेंथ का कोई भी रेडिएशन सूर्य की तरफ से पृथ्वी तक नहीं पहुंच पा रहा था जिससे वैज्ञानिकों ने यह खोज निकाला की ऐसी कोई ना कोई चीज जरूर वायुमंडल में स्थित है जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सोख ले रही है जिससे स्पेक्ट्रम में कालाक्षेत्र उत्पन्न हो जा रहा है। इस तरह ओजोन गैस की पर उत्पन्न हुई तथा उसकी खोज की गई।

Ozone layer की वायुमंडल में स्तिथि

ओजोन गैस एक प्रकार की गंध युक्त तथा हल्के नीले रंग की होती है।ओजोन परत में ओजोन गैस की मात्रा अत्यधिक मात्रा में पाई जाती है यह ऑक्सीजन गैस का ही एक प्रकार है जिसे O3 के नाम से जानते हैं क्योंकि जब ऑक्सीजन में 3 परमाणु आपस में जुड़ जाते हैं तो ओजोन परत का निर्माण होता है यह पृथ्वी के समताप मंडल और मध्य मंडल के बीचो बीच में स्थित होती है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है। ओजोन गैस में पृथ्वी की जहरीली किरणों को अवशोषित करने का बल होता है जिससे वह उन तीनों को छानकर पृथ्वी तक हम लोगों के पास भेजती है ऐसे में जब धूप हमारे शरीर पर पड़ती है तो हमें कोई प्रकार का नुकसान नहीं होता।

ओज़ोन परत कैसे नष्ट हो रही है?

जैसा कि हम जानते हैं की धीरे धीरे ओजोन परत छठ में लगी है या फिर आमतौर की भाषा में कहें तो यह नष्ट होती जा रही है जिसके पीछे यह कारण सामने आया है कि वैज्ञानिक ज्ञान को क्रीम गति से चलाने जो जहरीली गैस निकलती है और नाइट्रोजन ऑक्साइड होती है पता उसके साथ ही साथ और भी जहरीली गैस हम अपने इस्तेमाल करते हैं जैसे ऐसी में बृज में इन सभी ने क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस का इस्तेमाल किया जाता है यह सभी लहरी ली गैस वायुमंडल में जाकर ओजोन की परत को नष्ट कर रही हैं यही नहीं गैस के इंजनों से निकलने वाले धुएं कल कारखानों से निकलने वाले हो या आधी भी ओजोन परत को नष्ट तो कर ही रहे हैं और वर्तमान समय में यातायात क्षेत्र में बढ़ती गाड़ियों की वजह से भी उनके इंजन से निकलने वाले धुएं के कारण भी ओजोन परत को अत्यधिक नुकसान पहुंच रहा है यदि समय रहते ओजोन परत को बचाने का प्रयास नहीं किया गया तो इसका दुष्परिणाम देखने को मिल सकता है जोकि त्वचा का कैंसर आंखों की रोशनी चली जाना आदि जैसी बीमारी से इंसान हो जाएगा।

Ozone layer (ओज़ोन परत) का बचाओ

आज के समय में ओजोन परत को यदि नहीं बचाया गया तो आने वाला समय इसका दुष्परिणाम देखने को मिल सकता है इसलिए निम्नलिखित कुछ उपाय बताए गए हैं ओजोन परत को बचाने के जिससे आने वाले समय में हम पृथ्वी और ओजोन परत दोनों को ही बचा सकते हैं।

  • वाहनों का जितना हो सके कम प्रयोग करना चाहिए क्योंकि यातायात के वाहनों से निकलने वाले धोनी अत्यधिक हानिकारक होते हैं या जाकर ओजोन परत को हानि पहुंचाते हैं।
  • कभी-कभी हम देखते हैं कि हम अपने घरों में खेतों में कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं जो कि यह काफी ज्यादा हानिकारक होते हैं इसलिए कीटनाशकों की जगह प्राकृतिक तौर पर चीजों का उपयोग करना चाहिए।
  • हमने बचपन से ही हमेशा यह देखा है कि बिच्छू की कटाई रोकने के लिए कई तरह के जागरूक अभियान चलाए जाते हैं इसलिए विच को जितना काटेंगे ऑक्सीजन लेवल उतना ही कम होगा ऐसे में ओजोन परत भी घटने लगेगी और सूर्य की हानिकारक किरण हमारी पृथ्वी पर आने लगेंगी
  • जितना हो सके प्राकृतिक चीजों पर ही निर्भर रहें कृत्रिम चीजों को अत्यधिक इस्तेमाल में ना लाएं क्योंकि कृतिम चीजें हमेशा से ही वैज्ञानिक तौर पर निर्मित की जाती हैं और उन से नुकसान अधिक मात्रा में पहुंचता है।

पराबैंगनी किरणों से होने वाले हानिकारक प्रभाव

  • यदि ओजोन परत ना रहे तो पराबैगनी किरणों से स्क्रीन का कैंसर हो जाता है।
  • इस यूवी किरणों से शरीर की जो त्वचा होती है वह जल जाती है।
  • कई तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए हमारा एमिटी सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है।
  • ज्यादा समय तक यूवी किरणों में रहने से हमारे आंखों के उत्त को को काफी नुकसान पहुंचता है जिससे हमें स्नोब्लाइंड जैसी बीमारी हो सकती है।
  • इन कीड़ों की स्पष्टता से हमारे शरीर की त्वचा सिकुड़ने लगती हैं जिससे उम्र बढ़ने की बीमारी हो जाती है।
  • ओजोन परत के छठ जाने से तापमान में वृद्धि हो जाती है।

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6 thoughts on “Ozone layer (परत) क्या है?”
  1. This time you have provided the information in Hindi ❣️ really it will attract more viewers…. I liked it….and I like 😌🌹

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