जैसा कि आपको पता है कि पिछले कुछ महीनों से भारत में महंगाई अपने चरम सीमा पर है दिन-ब-दिन महंगाई बढ़ती जा रही है ऐसे में जनता इन मकानों से त्रस्त होकर अपने निचले स्तर पर आ चुकी है तो वही सरकार भी ऐसी परिस्थिति में काफी ज्यादा परेशान है वही देश की अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु कहां जाने वाले भारतीय रिजर्व बैंक अपने हर प्रयास में लगा हुआ है कि कैसे इन भाइयों को कम किया जा सके जिससे बढ़ती आबादी और बेरोजगारी के साथ साथ रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट भी इन महंगाई का कारण मांगे जा रहे हैं जिससे पिछले कुछ सालों में महंगाई ने अबकी बार अपने उच्च स्तर पर जा पहुंची तो आइए हम आपको बताते हैं कि यह रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या होता है तथा इसका महंगाई से क्या संबंध है।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या है?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा Repo Rate और Reverse Repo Rate की सहायता से भारत में फाइनेंशियल सिस्टम में लिक्विडिटी कंट्रोल करने का कार्य किया जाता है जिससे महंगाई की उच्च दर पर लगाम लगाया जा सके और ऐसी कार्यप्रणाली बनाई है जिससे आमजन को होने वाली असुविधाओं से बचाया जा सके। इसी के साथ ही साथ हम आपको बताते चलें की रेपो रेट वह रेट होता है जो कि भारत के अंतर्गत आने वाले वह सभी कमर्शियल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से लोन लेते हैं या फिर उधार लेते हैं उसके लिए यह एक रेपो दर सिक्स की जाती है तो वही रिवर्स रेपो रेट वह इंटरेस्ट रेट होता है जो रिजर्व बैंक के द्वारा उन कमर्शियल बैंक से अपनी दर पर पैसे वापस ले जाते हैं उन्हें हम रिवर्स रेपो रेट के नाम से जानते हैं।यह बात हमेशा ही निश्चित तौर पर मानी जाती है कि रेपो रेट हमेशा रिवर्स रेपो रेट से अधिक होता है जिसकी सहायता से इनफ्लेक्शन को कंट्रोल किया जा सकता है और जो फंड फ्लो होता है उसे घटाया और बढ़ाया जा सकता है और रिवर्स रेपो रेट की सहायता से कैश फ्लो कंट्रोल किया जाता है।

Repo Rate और Reverse Repo Rate

जैसा कि आपको बताया गया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की सहायता से फाइनेंशली सिस्टम को मैनेज किया जाता है इसके साथ ही साथ देश में बढ़ती महंगाई को भी रोकथाम का कार्य किया जाता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के घटने बढ़ने का प्रबंध आरबीआई के हाथों में होता है जो कि वह महंगाई को देखते हुए करती है। यदि रेपो रेट बढ़ता है या अधिक होता है तो कमर्शियल बैंकों को उच्च ब्याज दर पर रिजर्व बैंक के द्वारा लोन मिलता है और वह उसी हिसाब से आम जनता के बीच उच्च ब्याज दर पर लोन बंटती है वही रेट टू रेट यदि कम ब्याज दर पर बैंकों को मुहैया कराया जाएगा तो वह भी आम जनों को कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन मुहैया कराएगी ऐसे में महंगाई भी कम होगी।

RBI कैसे महंगाई की रोकथाम करता है

जैसा कि हम जानते हैं कि एक नामी में लिक्विडिटी तभी पड़ती है जब इंटरेस्ट रेट घट जाता है जिसके कारण 1 लोगों के पास ज्यादा मात्रा में पैसे का प्रबंध हो जाता है और उन्हें खरीदने की इच्छा और क्षमता निरंतर बढ़ती जाती है और यदि मांग बढ़ेगी तो महंगाई निश्चित रूप से बढ़ेगी ऐसे में आरबीआई को हस्तक्षेप करके महंगाई को कंट्रोल करना पड़ता है वह क्या करता है कि रिपोर्ट को बढ़ा देता है इससे लिक्विडिटी जो होती है वह घट जाती है और महंगाई भी अपने कंट्रोल में आ जाती है करो ना कि काफी ज्यादा बुरा असर देखने को मिला था उस वक्त रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को घटाकर लिक्विडिटी को बढ़ाया था इससे आर्थिक विकास में तेजी देखने को मिली तो यह तरीका होता है आरबीआई का महंगाई को रोकथाम करने का।

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