वर्तमान समय में जब भी आप किसी होटल रेस्टो आदि जगहों पर जाते होंगे तो अक्सर ही वहां पर छोटे बच्चों को कार्य करते जरूर देखते होंगे क्या आपने कभी सोचा है कि किन कारण से उन छोटे-छोटे बच्चों को वहां पर कार्य करना पड़ता है छोटी सी उम्र में जब हमने स्कूल जाने के लिए सुबह उठना चाहिए तो उसके उलट वह किसी होटल में किसी रेस्टो में किसी कल कारखानों में कहीं-कहीं दुकानों पर काम करने के लिए पहुंच जाते हैं वर्तमान समय में यदि देखा जाए तो भारत में सबसे बड़े मुद्दे अगर कोई है तो वह बाल श्रम अथवा बाल मजदूरी का ही है ऐसा नहीं है कि यह मुद्दा सिर्फ भारत में ही है यह विश्व के कई देशों में भी ऐसा ही चला रहा है तो आज हम विशेषकर उन मुद्दों पर बात करेंगे क्योंकि समाज में थोड़े बदलाव लाने के लिए जरूरी है बाल मजदूरी क्या है तथा भारत में उसकी स्थिति की समीक्षा इस आर्टिकल के द्वारा किया जाएगा।

 

बाल श्रम/बाल मजदूरी (Child Labour) क्या है?

विश्व मैं भारत के साथ-साथ कई देशों में बाल श्रम को बहुत ही आम बात मानी जाती है जोकि सबसे बड़ी समस्या है अमूमन आप जब भी कहीं जाते होंगे तो आपको छोटे-छोटे बच्चों जो कि 8 से 14 साल के बीच के अधिकतर होते हैं वह कहीं ना कहीं काम करते हुए जरूर देखते होंगे जिसके कारण उनकी शुरुआती शिक्षा तथा सामाजिक रहन-सहन में बदलाव हो जाता है वह शिक्षा से दूर होने लगते हैं एवं समाज उन्हें एक अलग अलग तरीके से रखने का कार्य करता है ऐसा कदापि नहीं होता है कि वह अपनी इच्छा अनुसार वहां कार्य करते हैं कुछ विकट परिस्थितियों के कारण उन्हें यह कार्य करने पर मजबूर होना पड़ता है जिसकी वजह से उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है अधिकतर तौर पर आप देखेंगे कि होटल रिस्ट्रो दुकानों पर कारखानों में रिक्शा चलाते हुए यह सब कार्य करते हुए आपको छोटे बच्चे जरूर दिख जाएंगे भारत में बाल श्रम को लेकर काफी ज्यादा संतोषजनक स्थिति मानी जाती है जोकि इसमें बदलाव की जरूरत है निम्नलिखित हम और भी बातें उससे संबंधित बताने जा रहे हैं।

 

कोरोना महामारी में बाल श्रम की स्तिथि:

वर्तमान समय में कोविड-19 ने बहुत तेजी से बाल श्रम अथवा बाल मजदूरी को बढ़ावा देने का कार्य किया है इस महामारी में बहुत से ऐसे घर थे जहां पर आर्थिक रूप से ऐसी स्थिति पैदा हो गई जिस पर किसी भी योजना का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा परिणाम स्वरूप छोटे-छोटे बच्चों को घर से बाहर निकलना पड़ा तथा अपने घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उन्हें कार्य भी करना पड़ा ऐसा बिल्कुल नहीं है किक बाल मजदूरी कोरोना महामारी के कारण ही बड़ी जबकि इसके कारण बहुत पहले से ही समाज में मौजूद है आर्थिक जीवन में बदलाव गरीबी इन सभी चीजों को जब एक बच्चा अपने घर में देखता है तो उसके अंदर पहले शिक्षा ग्रहण करके कार्य करने की क्षमता उत्पन्न होती है और ऐसा मनोवैज्ञानिक तौर पर भी कहा जाता है कि जब दिमाग को किसी चीज की आवश्यकता पड़ती है तो वह पहले किया जाता है इन्हीं सब चीजों को व्यवस्थित करने के लिए घर का एक छोटा बच्चा कार्य करने के लिए बाहर निकलता है।

 

बाल श्रम (Child Labour)

यदि बाल श्रम की बात की जाए तो यह किसी भी देश के द्वारा निर्धारित संविधान के अंतर्गत कार्य करने की जो उम्र सीमा का मानक तय किया गया है उससे कम उम्र के बच्चे कार्य करते हैं तो वह बाल श्रम में गिना जाता है जोकि कई देशों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैरकानूनी माना जाता है तथा कहीं कहीं जगह तो इससे घनघोर अपराध की श्रेणी में रखा जाता है। भारत सहित बहुत से ऐसे देश हैं जहां पर इसके लिए आंदोलन भी होते हैं तथा उसके साथ साथ बाल श्रम को रोकने के लिए कार्रवाई भी की जाती है। मौजूदा समय में यदि विश्व की बात की जाए तो लगभग तीन करोड़ बच्चे जो कि 2 वर्ष से लेकर 14 वर्ष के बीच के हैं वह बाल श्रम करने के लिए लिप्त है जोकि दुकानों पर सफाई का काम कर रहे हैं तो होटलों में बर्तन धोने का काम कर रहे हैं। स्थिति तो इतनी ज्यादा खराब चल रही है कि 11 वर्ष के बच्चे 20–20 घंटे दिन में कार्य करते हैं कुछ पैसों के लिए जो कि काफी ज्यादा दुख की बात है ऐसा नहीं है कि बाल श्रम को लेकर कानून नहीं बने कानून बने जो की कठोर भी हैं कि यदि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ कार्य कराया गया तो उसे कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रावधान है परंतु इन सभी चीजों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

 

बाल मजदूरी करने के लिए विवश बच्चे कहा कहा कार्य करते है?

बाल मजदूरी करने के लिए जो बच्चे विवश होते हैं तथा अपने घर की आर्थिक स्थिति को देखकर उन्हें कार्य करना पड़ता है वह होटलों में बर्तन धोने का कार्य जूते पॉलिश करने का कार्य चाय की दुकान पर कपड़े की दुकान पर कारखानों में कूड़ा बीनने का कार्य रिक्शा चलाने का कार्य गाड़ी पोछने का कार्य कहीं-कहीं घरों में नौकरों का कार्य यह सब इन्हें करना पड़ता है इतना ही नहीं कई कई कार्य तो जानलेवा भी साबित होते हैं जैसे कोयले की खदान में कार्य करना पहाड़ों से पत्थर निकालने के लिए कार्य करना सड़कों की मरम्मत के लिए रेलवे पटरियों के लिए इन सब के लिए उन्हें अपने सपनों को निचोड़ कर किनारे रखना पड़ता है तथा अपने घर की आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उन्हें घर से निकलना पड़ता है शिक्षा आदि से यह काफी दूर चले जाते हैं जो कि आगे चलकर बहुत दुष्ट परिणाम देखने को मिलता है।

 

बाल श्रम के लिए सविधान में कानून

भारतीय संविधान में बाल श्रम के लिए बहुत खूब कदम उठाए गए तथा एक कानून बनाया गया जिसके अंतर्गत यदि कोई भी बच्चा बाल श्रम करते हुए पाया जाता है तो उसके मालिक या जो उससे कार्य करवा रहा है उसे कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रावधान प्रयुक्त किया गया है। यही नहीं भारतीय संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 23 के कि यदि किसी भी प्रकार का बाल श्रम गैरकानूनी है तथा उसके साथ साथ अनुच्छेद 24 में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे से बाल श्रम कराना गैर कानूनी अपराध है इसी के साथ बाल श्रम अधिनियम (निषेध और विनियमन)1986 भी लाया गया जिसके अनुसार,14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खतरनाक उद्योगों तथा प्रक्रियाओं में काम करने से रोकने का कार्य किया गया है और उन बच्चो को शिक्षा देने के लिए MNREGA 2005, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और मध्याह्न भोजन योजना जैसे नीतियों का प्रावधान किया गया जिसके द्वारा 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा तथा भोजन की व्यवस्था की जाती है।

 

बाल श्रम के मुद्दे जिनपर ध्यान देना चाहिए

उपरोक्त बाल श्रम से संबंधित सभी बातें विस्तार से बताई गई हैं तथा वर्तमान समय में किन किन कारणों से बाल श्रम बढ़ रहा है तथा उन मुद्दों को किस प्रकार से संयोजक कर देखना चाहिए यह सभी हम आपको निम्नलिखित बताने जा रहे हैं

 

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बाल श्रम समस्या

बाल श्रम अथवा बाल मजदूरी के कारण बहुत से ऐसे बच्चे हैं जोकि अपनी स्कूली शिक्षा ग्रहण ना करके शुरुआती दौर से ही कार्य करने में लग जाते हैं जिससे उनकी मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में बहुत ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है जिन कारणों से वाह बहुत सी बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं यदि बच्चे शिक्षा नहीं ग्रहण करेंगे तो आगे चलकर साक्षरता में भी कमी देखने को मिलेगी तथा शिक्षा का सीधा संबंध अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा जाता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा

भेद भाव की स्तिथि उत्पन्न होना

बाल श्रम के कारण मौजूदा समय में सामाजिक तौर पर भेदभाव की स्थिति देखने को मिलती है जिसके कारण 14 वर्ष से कम उम्र के जो बच्चे होते हैं जो बाल श्रम करने के लिए विवश होना पड़ता है जिन्हें वह खुद को समाज से दूर करते रहते हैं तथा एक सामाजिक दूरी बीच में उत्पन्न हो जाती है जिन कारणों से उनका समाज से विश्वास उठता जाता है तथा वह कई ऐसे गलत कार्यों में सम्मिलित हो जाते हैं जिससे और फिर ज्यादा सुविधाएं सामने दिखने लगती हैं।

अनौपचारिक रूप से बाल श्रम

वर्तमान समय में भारत में बाल श्रम पर कानूनी रूप से रोक लगी हुई है जिसका प्रभाव शहरी क्षेत्र में देखने को मिलता है परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में जो अनौपचारिक क्षेत्र हैं जैसे ईट भट्टे कालीन मत्स्य पालन खेती आदि में बाल श्रम बहुत तेजी से चल रहा है जहां पर 14 वर्ष तक के बच्चों को कार्य करने के लिए विवश होना पड़ता है।

बाल श्रम में कानूनी सजा का प्रावधान

भारतीय संविधान के अंतर्गत बाल श्रम अधिनियम 1986 के कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति अपने निजी फायदे या फिर अपने व्यवसाय के उद्देश्य किसी भी 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को कार्य करने के लिए विवश करता है अथवा कार्य कर आता है तो वह कानूनी तौर पर अपराधी माना जाएगा तथा उसे 2 साल की सजा और ₹50000 के जुर्माने का प्रावधान निर्धारित किया गया है जिसके अंतर्गत यदि कोई भी कल कारखानों में या फिर ऐसी जगह जो काम करने में जानलेवा साबित हो सकती है उसके लिए इन सजा का प्रावधान बढ़ाया भी जा सकता है।

आमजनों से बाल श्रम के विरुद्ध अपील

बाल श्रम से संबंधित इस लेख को लिखने का मुख्य उद्देश्य यही था कि आम जनों को बाल श्रम के विरुद्ध मुहिम में हिस्सा लेना चाहिए तथा अपने आसपास के क्षेत्रों में यदि कोई भी बच्चा बाल श्रम करते हुए दिखाई पड़ता है तो उससे उसकी स्थिति की जानकारी एकत्र करके उसे शिक्षा के लिए प्रेरित करें तथा उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने का प्रयास करें जिससे कोई भी बच्चा अपनी शिक्षा के अधिकार को छोड़कर बाल श्रम करने के लिए विवश ना होना पड़े यदि आमजन इन परिस्थितियों को समझेंगे तथा किसी ऐसे बच्चे जो कि आर्थिक एवं सामाजिक रूप से दूरी बना रहे हैं उन्हें फिर से एक समाज के तौर पर व्यवस्थित करेंगे तो यह एक राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान माना जाएगा।

By – Mr. Informer

Thankyou for visiting my blog !

0 thoughts on “बाल श्रम क्या है और यह बच्चों को कैसे प्रभावित करता है ?”
  1. Child labour is affecting life of many childrens , which should be stopped… By the way very informative article

  2. बाल मजदूरी एक बहुत बड़ा मुद्दा है,जिसको आपने अपने आर्टिकल के द्वारा लोगो तक पहुंचा कर प्रेरित करने का कार्य किया है,वास्तव में यह पढ़ने योग्य है।

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